स्कूलों में बढ़ रहा नशे का खतरा: मोबाइल-इंटरनेट से बढ़ी समस्या, 6,168 किशोरों पर अध्ययन में खुलासा
आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई और जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। लेकिन इसका अत्यधिक और असीमित यूज किशोरों के लिए कई तरह की दिक्कत भी पैदा कर सकता है। हाल ही में 6,168 किशोरों पर किए गए एक अध्ययन में मोबाइल-इंटरनेट के इस्तेमाल और नशे के बढ़ते खतरे को लेकर महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं।
6,168 किशोरों पर किया गया अध्ययन
अध्ययन में देश के अलग-अलग शहरों के 108 स्कूलों में पढ़ने वाले 10 से 19 वर्ष की उम्र के किशोरों को शामिल किया गया। यह अध्ययन अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किया गया।
इस अध्ययन मे छः शहरो को शामिल किया गया था 108 स्कूल मे से1680 किशोर इस अध्ययन मे भाग लिया था
गुवाहाटी में सबसे अधिक खतरा
अध्ययन के अनुसार किशोरों में नशे के खतरे वाली श्रेणी का प्रतिशत अलग-अलग शहरों में इस प्रकार रहा:
गुवाहाटी – 42.3%
देवघर – 41.3%
गोरखपुर – 24.5%
राजकोट – 13.5%
नागपुर – 7.1%
पुडुचेरी – 0.1%
मोबाइल और इंटरनेट का क्या संबंध है?
अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन किशोरों को आसपास नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध होने की जानकारी थी और जो मोबाइल-इंटरनेट की दुनिया में अधिक समय बिताते थे, उनमें नशे से जुड़े खतरे अधिक पाए जाने की संभावना थी।
मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से बच्चों तक कई तरह की सामग्री आसानी से पहुंच सकती है। इसलिए अभिभावकों और स्कूलों के लिए यह जरूरी है कि वे बच्चों के डिजिटल व्यवहार पर ध्यान दें और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल के बारे में समझाएं।
लड़कियों की तुलना में लड़कों में अधिक खतरा
अध्ययन में यह भी बताया गया कि लड़कियों की तुलना में लड़कों में नशे का खतरा अधिक पाया गया। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि लड़कियां इस समस्या से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका
बच्चों को केवल मोबाइल से दूर रखना ही समाधान नहीं है। जरूरत है कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों से खुलकर बातचीत करें।
कुछ महत्वपूर्ण कदम:
बच्चों के मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल के लिए उचित समय तय करें।
उनके ऑनलाइन व्यवहार पर नजर रखें।
नशे और उसके नुकसान के बारे में सही जानकारी दें।
बच्चों में खेल, पढ़ाई और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दें।
बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो उससे बातचीत करें।
स्कूलों में नशा-विरोधी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
निष्कर्ष
यह अध्ययन बताता है कि किशोरों में नशे का खतरा केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि परिवार, स्कूल और समाज के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। मोबाइल और इंटरनेट आज की जरूरत हैं, लेकिन इनके गलत या अत्यधिक इस्तेमाल से पैदा होने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बच्चों को तकनीक से दूर करने के बजाय उन्हें तकनीक का सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल सिखाना ज्यादा जरूरी है। समय रहते जागरूकता और सही मार्गदर्शन से किशोरों को नशे जैसी गंभीर समस्या से बचाया जा सकता है।
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